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18 October, 2014

6 Google की Website जो आपकी सहायता करेंगी : आपको कभी नहीं भूलना चाहिए


1. Google  Search Engine में आपने क्या नाम लिखकर खोजा इसकी पूरी History Google रखता है और आप देख सकते कि आपने किस दिन क्या नाम लिखकर कौनसी Website खोली थी.
https://history.google.com


2. आपका Android Phone आप कितने किलोमीटर चले और किस गति से चले इस का पूरा record रख सकता है आप इसको चेक कर सकते है निम्नलिखित Url से और इसे आप Google Drive में Export भी कर सकते है.
https://maps.google.com/locationhistory


3. अगर आपको चिंता हो रही है कि कहीं आपकी Email Id कोई और तो नहीं चला रह है तो आप इस Url की सहायता से जान पायेंगे कि किस IP Address और location पर आपका Id use हुआ है.
https://security.google.com/settings/security/activity

4. Google आपको ऐसी सुविधा देता है जिससे आप Google System पर आपके द्वारा Upload किये गए सारे Youtube Videos, Photos, Gmail message और Contacts Download कर सकते है. निम्लिखित Url पर क्लिक करें-
https://www.google.com/takeout

5. अपने मौजूदा Email address के साथ आप नया Gmail Account खोल सकते है इस Url से। और पूरी Process वही है लेकिन इस Url की सहायता से आपको अपनी Id से log out नहीं होना पड़ेगा
https://accounts.google.com/SignUpWithoutGmail

6. अगर कोई आपकी Website के Content को Copy कर के Use कर रहा है तो आप उसकी Complaint  DMCA की website पर जाकर कर सकते है. और Google उस Page को Search Engine से हटा देगा या उस website को बंद कर देगा.
https://support.google.com/legal


मेरी अगली Post - Mobile और Computer के बिच File कैसे Transfer करे बिना किसी USB Cable और Bluetooth.


25 September, 2014

प्रसंस्करण उद्योग



प्रसंस्करण उद्योग
फलों व सब्जियों से कई प्रकार के खाद्य-पदार्थ बनाकर अधिक लाभ कमाया जा सकता है। फलों से अचार, शर्बत, रस, मुरब्बा, जैम, जैली, साॅस, स्क्वैश, चटनी एवं टमाटर के फलों से कैचप, साॅस, चटनी, प्यूरी, पेस्ट आदि कई प्रकार के खाद्य पदार्थ बनाये जाते है। गाजर, पेठा, लौकी, परवल आदि कई सब्जियों से कुछ मिठाईयां बनाई जाती है। आगरा के पास पेठा से बनाई जाने वाली मिठाई को काफी पसन्द किया जाता है तथा इस प्रकार एक लघु उद्योग भी काम कर रहा है। फूलगोभी, करेला, परवल, कुन्दरू, मिर्च आदि से अचार बनाया जाता है। लहसुन, प्याज, अदरक, पुदीना, करेला, चैलाई आदि सब्जियाँ पौष्टिक होने के साथ औषधीय गुणों से भरपूर है। इनके कई प्रकार के पदार्थ बनाकर इनकी बिक्री कीमत बढ़ाई जा सकती है। प्याज व मेथी को छोटे टुकड़ों में काटकर तथा सुखाकर मसाले की तरह बेचा जा सकता है। खरबूजे व खीरे के बीजों को कई तरह की मिठाईयांे में एवं इसके अतिरिक्त ठंडे शर्बतों मंे प्रयोग किया जाता है। तरबूत व खरबूजे के रस को निकालकर पेय पदार्थ की तरह प्रयोग किया जा सकता है। कई सब्जियों (कद्दू, खरबूजा, तरबूज, करेला आदि) के बीजों में वसा (तेल) की मात्रा पाई जाती है तथा इनसे खाद्य तेल निकाले जा सकते है। मिर्च से तीखा पदार्थ (ओलीरियोसीन) द्रव्य के रूप में निकालकर विदेशी मुद्रा कमाई जा सकती है।

फसल विविधता

फसल विविधता:- विविधता का चुनाव विभिन्नताओं से किया गया है, क्योंकि कृषि व खाद्य सामग्री के उत्पादन में जैविक एवं भौतिक विभिन्नताओं का उचित प्रबन्धन करना तथा उचित अनुवांशिकी, किस्मों की कृषि के विकास के लिए आवश्यकता इत्यादि को प्रदर्शित करती है। इमें निम्न बिन्दुओं को आधार बनाया जा सकता है।
1. विभिन्न फसलों की किस्में, पशुपालन की नस्लें, घास एवं चारागाहों का पारिस्थिकीय तंत्र
2. पारिस्थिकीय तंत्र जिसमें सूक्ष्म जीवों, लाभदायक कीटों एवं पेड़पौधों की कृषि उत्पादन में अहम भूमिका रहती है।
3. फसल विविधता के लिए मानव द्वारा उपलब्ध अनुवांशिकी आधार, भौतिक परिस्थितियां एवं प्रबन्धन को इसका अंग माना गया है।
 संसार में कुल 270000 उच्च पादपों की प्रजातियों में से मात्र 7000 जातियों का उपयोग ही कृषि के लिए किया जाता है। इनमें भी गेहूं, चावल तथा मक्का को अधिक उर्जा प्राप्ति का स्त्रोत माना जाता है। इसलिये 50 प्रतिशत से अधिक लोग जीवन यापन के लिये इनका अधिक उपयोग करते है। मांस एवं मछली को भी उर्जा का अच्छा स्त्रोत माना जाता है। वह भी चारागाहों एवं वनस्पतियों पर निर्भर है।
फसल विविधता को परिभाषित करना कठिन है किन्तु इस सन्दर्भ में अन्तर्राष्ट्रीय कृषि एवं खा़ संगठन (1999) ने कहा कि फसलों, पशुधन एवं सूक्ष्म जीवों की जातियां एवं भिन्नताएं, जिनका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि उत्पादन एवं सुरक्षा के लिए परिस्थितिकीय तंत्र को बनाये रखने में आवश्यक अंग माना है।
फसल विविधता के अन्तर्गत उन सभी तत्वों को रखा जा सकता है, जो जैविक विविधता के लिये उपयोगी है, तथा कृषि परिस्थितिकीय तंत्र के लिये आवश्यक है।
फसल विविधता के मूल तत्वों में अनुवांशिक तत्वों की उपलब्धता को कृषि एवं खाद्य के लिये आधार रूप में चुना गया है। इसके साथ-साथ जैव विविधता को रखा गया है। जिसमें परिस्थितिकीय तंत्र आता है। तीसरे स्थान पर अजैविक कारकों एवं कृषि प्रबन्धन को सम्मिलित किया गया है।
फसल विविधता का महत्व
1. खाद्य एवं जीवनोउपार्जन सुरक्षा का आधार विकसित करने की कड़ी माना गया है।
2. फसल विविधता को किसानों के द्वारा उनकी आवश्यकताओं में जैव विविधता से बदलाव किया जा सकता है।
3. अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कृषि एवं खाद्य के लिये अनुवांशिकी सामग्री उपलब्ध होती है।
4. विभिन्न फसलों की जातियों एवं किस्मों में विविधता लाई जा सकती है।
5. जैव विविधता एवं फसल विविधता की आवश्यकताओं के लिये जीन बैंक स्थापित किया जाना चाहिये।
6. फसल विविधता खाद्य पदार्थों के साथ-साथ कपड़ा, दवाईयां, सुरक्षा आदि के लिये भी उपयोगी है।
फसल में हेर-फेर
फसल में हेरफेर फसल-चक्र से मतलब यह है कि चुनी हुई फसलों को एक के बाद दूसरी निश्चित क्रम में ही क्षेत्र मंे एक निश्चित अवधि तक उगाना। नियोजित फसल-चक्र के अनेक लाभ है जैसे-
1. भूमि की उर्वरा शक्ति में हृास की कमी।
2. मृदा-क्षति से बचाव।
3. श्रम का उचित उपयोग।
4. रोग व कीड़ों से बचाव।
5. भूमि के सभी क्षेत्रों के पोषक तत्वो का उपयोग।
6. फसल की गुणवत्ता एवं उपज में बढ़ोतरी।
फसल हेर फेर अथवा फसल-चक्र में फसलों एव उनके क्रम का चयन बड़ी सावधानी से करना चाहिए। आम तौर पर उत्पादन के लिए फसल चुनते है जिनकी बाजार में मांग अधिक हो और जिनसे अधिक धन की प्राप्ति हो, परन्तु इसके अलावा फसलों का चयन करते समय भूमि की उर्वरा शक्ति, उसका क्षारांश (पी.एच.मान), व रोग व कीट सम्बन्धी इतिहास, सिंचाई, श्रम आदि की सुविधाओं का भी ध्यान देना अनिवार्य है। फसलों का चक्र निश्चित करते समय उपर लिखें बातों का ध्यान मुख्य रूप से करना चाहिए।
Computer Tipsआपके ब्राउज़र की History नहीं बनेगी
क्या आप चाहते है कि आप इन्टरनेट पर जो भी सर्च करें और जो भी पासवर्ड लगाए या जो भी वेबसाइट खोले उसकी जानकारी आप के कंप्यूटर या ब्राउज़र में सेव ना रहे तो ऐसा हो सकता है। और इस की सहायता से आप को अनचाहे वायरस से भी छुटकारा मिल जाएगा।..
 
ऑनलाइन पैसे कैसे कमायेंब्लॉग कैसे बनाये और कैसे पैसे कमायें
एक सफल वेबसाइट बनाने के लिए आपको उस पर रोजाना पोस्ट करते रहना पड़ेगा। आपको उसको रोजाना अपडेट करते रहना पड़ेगा। लोगों को उनकी इच्छानुसार पोस्ट देनी पड़ेगी। आजकल इन्टरनेट पर..
 

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